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अप्रैल 30 – समर्पण का दर्शन।
“जब लूत अब्राम से अलग हो गया तब उसके पश्चात यहोवा ने अब्राम से कहा, आंख उठा कर जिस स्थान पर तू है वहां से उत्तर-दक्खिन, पूर्व-पश्चिम, चारों ओर दृष्टि कर.” (उत्पत्ति 13:14)
इब्राहम को आशीष देने के लिए, प्रभु ने उसे दो महत्वपूर्ण निर्देश दिए. पहला, उसने कहा, “अपनी आँखें उठा और जिस स्थान पर तू है, वहाँ से उत्तर, दक्षिण, पूरब और पश्चिम की ओर देख.” दूसरा, उसने कहा, “उठ, इस देश में इसकी लंबाई और चौड़ाई में घूम-फिर.”
प्रभु का क्या भाग था? इब्राहम और उसके वंशजों को वह सारी भूमि देना, जिसे उसकी आँखें देख सकें और जिस पर उसके पैर चल सकें. बाइबल कहती है: “वह तो ऐसे बड़े कर्म करता है, जिनकी थाह नहीं लगती; और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जा सकते.” (अय्यूब 9:10)
प्रभु से पूछें कि वह आपसे क्या करवाना चाहता है, ताकि वह आपके जीवन में महान कार्य पूरे कर सके.
उदाहरण के लिए: मूसा का कर्तव्य था कि वह अपनी लाठी लाल सागर की ओर बढ़ाए. और परमेश्वर का कर्तव्य था कि वह सागर को दो भागों में बाँट दे. सूखे हाथ वाले व्यक्ति को विश्वास के साथ अपना हाथ आगे बढ़ाना था. और परमेश्वर ने उसे दूसरे हाथ जैसा ही ठीक कर दिया. नामान को यरदन नदी में सात बार डुबकी लगानी थी. और परमेश्वर ने उसका कोढ़ दूर कर दिया और उसे नया मांस दिया.
हमारा कर्तव्य है कि हम दशमांश परमेश्वर के भवन में लाएँ. परमेश्वर का भाग है कि वह स्वर्ग की खिड़कियाँ खोले और अपनी आशीषें उंडेल दे.
आज भी, आप क्या चाहते हैं कि प्रभु आपके लिए करे? विश्वास के साथ उसकी ओर देखें. कुछ लोग सुबह उठते ही तुरंत अखबार देखने लगते हैं, लेकिन वे परमेश्वर के वचन की ओर नहीं देखते.
अपनी आँखें ऊपर उठाएँ, ताकि आपके चारों ओर प्रभु के नाम की महिमा हो सके. शारीरिक आँखें केवल थोड़ी दूरी तक ही देख सकती हैं, लेकिन आत्मिक आँखें—दर्शन की आँखें—पूरी दुनिया को देख सकती हैं. इसलिए, अपने दर्शन की सीमाओं का विस्तार करें और उन आशीषों की ओर देखें जो प्रभु ने आपके लिए तैयार की हैं.
इसके बाद, उन स्थानों की ओर विश्वास की अपनी यात्रा शुरू करें जिन्हें आप दर्शन की आँखों से देखते हैं. प्रभु ने कहा है: “जिस-जिस स्थान पर तुम्हारे पाँव के तलवे पड़ेंगे, वह सब मैं ने तुम्हें दे दिया है.”
दुनिया की कोई भी सरकार ऐसा शानदार वादा नहीं कर सकती. इसलिए, अपनी सोच का दायरा बढ़ाएँ और विश्वास के साथ आगे बढ़ें.
परमेश्वर के वचन सुनने के तुरंत बाद इब्राहम ने क्या किया? उसने आज्ञा मानी. उसने अपना डेरा उठाया और हेब्रोन के माम्रे के मैदानों में बस गया. वहाँ उसने प्रभु के लिए एक वेदी बनाई और उसकी आराधना की (उत्पत्ति 13:18).
परमेश्वर के प्रिय लोगों, इब्राहीम को दिए गए वादे आपके लिए भी हैं, क्योंकि हम सब इब्राहीम की संतान हैं और उस प्रतिज्ञा के वारिस हैं जो परमेश्वर ने इब्राहीम को दिया है.
मनन के लिए वचन: “इब्राहीम वृद्ध था और उसकी आयु बहुत थी और यहोवा ने सब बातों में उसको आशीष दी थी.” (उत्पत्ति 24:1)
