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फ़रवरी 27 – शांत रहे।
“शांत रहो, और जान लो, कि मैं ही परमेश्वर हूं. मैं जातियों में महान हूं, मैं पृथ्वी भर में महान हूं!” (भजन 46:10)
जब आपका ह्रदय बेचैन हो, जब आप बहुत सारी चिंताओं से परेशान हो, और जब आप असमंजस्त मे हो और समझ न पाए कि क्या करना है, तो चुपचाप प्रभु के चरणों में बैठे. जब आप ऐसे लोगों से घिरे हो जो हर चीज़ में गलती निकालते हैं—जहाँ अच्छी बातों को भी गलत समझा जाता है और हर काम की बुराई की जाती है—तो चुपचाप बैठना बैठना चुने आउए शांत रहे.
जब आप शांत रहेगे, तो प्रभु खुद आपके लिए लड़ेंगे और आपकी लड़ाई उनकी लड़ाई होगी. जब आप शांत रहेगे, तो आप देखेगे कि प्रभु आपके लिए जोश से उठ खड़े होते हैं.
क्या आज आपके खिलाफ कोई तूफान आ रहा है? क्या आपकी ज़िंदगी का समंदर उथल-पुथल में है? क्या आपकी सारी कोशिशें बेकार लगती हैं? प्रभु के सामने बैठे. तब प्रभु उठेंगे और तूफान और समंदर को हुक्म देंगे, “शांत हो जाओ, शांत हो जाओ,” और वह शांत हो जायेगे.
ठीक यही गलील के झील मे हुआ था जब शिष्य उसे पार कर रहे थे. भयंकर तूफान और तेज़ लहरें शांत हो गईं. वह झील—लगभग अठारह मील लंबा और तेरह मील चौड़ा—शांत हो गया. तूफान थम गया, और ईश्वरीय शांति छा गई.
कई संतों का भी यही अनुभव रहा है. जब उनकी सेवा के खिलाफ़ परेशानियाँ और विरोध होता है, तो वे दो या तीन दिन के लिए चुपचाप प्रभु के साथ अकेले समय बिताने के लिए चले जाते हैं. वे प्रार्थना में उनके पैरों पर गिर पड़ते हैं. वे अपना दुख और दर्द सिर्फ़ प्रभु को बताते हैं. और जब वे बाज़ों की तरह ताकत से भरकर लौटते हैं, तो पाते हैं कि प्रभु ने उनके लिए काम पहले ही पूरा कर दिया है.
जब इस्राएली मिस्र की सेना को अपना पीछा करते हुए देखकर डर गए—रथ और सैनिक तेज़ी से आगे बढ़ रहे थे—और उन्हें डर था कि फिरौन क्या कर सकता है, तो क्या आप जानते हैं मूसा ने क्या कहा? “मूसा ने लोगों से कहा, डरो मत, खड़े खड़े वह उद्धार का काम देखो, जो यहोवा आज तुम्हारे लिये करेगा; क्योंकि जिन मिस्रियों को तुम आज देखते हो, उन को फिर कभी न देखोगे. यहोवा आप ही तुम्हारे लिये लड़ेगा, इसलिये तुम चुपचाप रहो॥” (निर्गमन 14:13-14)
जब यह कहा जाता है, “आप शांत रहे” तो इसका क्या मतलब है? इसका सीधा सा मतलब है कि आप चुपचाप बैठे रहे या आप कोई प्रतिक्रिया न दे. प्रेरित पतरस भी इसी तरह की सलाह देते हैं—न केवल चुपचाप बैठने की, बल्कि समर्पित और विनम्र रहने की:
“इसलिये परमेश्वर के बलवन्त हाथ के नीचे दीनता से रहो, जिस से वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए.” (1 पतरस 5:6)
परमेश्वर के प्रिय लोगों, जिस समय आप प्रभु के सामने शांत बैठते है, वही समय आप देखेगे कि दुष्टों पर क्या आता है. यह वह क्षण है जब प्रभु आपकी ओर से एक शक्तिशाली योद्धा के रूप में उठेगा. तब आप प्रभु की महानता और महिमा को देखेगे.
मनन के लिए: “इसलिये हे मेरे दास याकूब, तेरे लिये यहोवा की यह वाणी है, मत डर; हे इस्राएल, विस्मित न हो; क्योंकि मैं दूर देश से तुझे और तेरे वंश को बंधुआई के देश से छुड़ा ले आऊंगा. तब याकूब लौट कर, चैन और सुख से रहेगा, और कोई उसको डराने न पाएगा.” (यिर्मयाह 30:10)
