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अप्रैल 05 – डरो मत।
“और यीशु ने उनसे कहा, ‘डरो मत…’” (मत्ती 28:10).
अंतंतुल्ला अप्पम परिवार के प्यारे सदस्यों, मैं हमारे प्रभु यीशु मसीह के मधुर नाम में, आप सभी को पुनरुत्थान दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ देता हूँ.
पृथ्वी पर अपने दिनों के दौरान, यीशु मसीह ने अनेक उपदेश दिए और सांत्वना भरे अनेक वचन कहे. कई बार उन्होंने अपने शिष्यों और विश्वासियों से कहा, “डरो मत.” फिर भी, पुनरुत्थान के बाद उन्होंने अपने शिष्यों से जो शब्द कहे—”डरो मत”—उनमें एक विशेष सामर्थ्य और सांत्वना निहित है.
पुनरुत्थित यीशु को देखिए. केवल उन्होंने ही मृत्यु पर विजय पाई है और कब्र को जीता है. केवल उन्होंने ही शत्रु का सिर कुचला है. जब वे कहते हैं, “डरो मत,” तो हमें अब मृत्यु, कब्र या शैतान से डरने की कोई आवश्यकता नहीं रहती.
जब सांसारिक नेता या अधिकारी कहते हैं, “डरो मत,” तो उनके शब्दों का लाभ बहुत सीमित होता है. अधिक से अधिक, वे हमें कुछ सांसारिक भयों से थोड़े समय के लिए राहत दे सकते हैं. परंतु वे मानवता को शैतान से, कब्र की शक्ति से, अथवा स्वयं मृत्यु से नहीं बचा सकते.
किंतु उस पुनरुत्थित उद्धारकर्ता को देखिए, जो कहते हैं, “डरो मत.” वे एक पराक्रमी योद्धा और एक प्रभावशाली अगुवा के रूप में खड़े हैं. राजाओं के राजा के रूप में—जिनके पास स्वर्ग और पृथ्वी पर समस्त अधिकार है—वे घोषणा करते हैं, “डरो मत.” केवल प्रभु यीशु के पास ही ऐसा सर्वोच्च अधिकार और सामर्थ्य है, जो इन शब्दों के द्वारा संपूर्ण मानवता को वास्तव में सांत्वना दे सकते हैं.
कोई व्यक्ति तब भयभीत होता है, जब वह परमेश्वर की उपस्थिति का अनुभव नहीं करता; अथवा जब वह ईश्वरीय सामर्थ्य के साथ परिस्थितियों का सामना नहीं कर पाता. शिष्यों के साथ ठीक यही हुआ था. जब यीशु को क्रूस पर चढ़ाया गया और उनकी मृत्यु हो गई, तो उन्हें लगा कि सब कुछ समाप्त हो गया है. वे व्याकुल और हताश थे, क्योंकि वे उस उद्धारकर्ता की वास्तविक पहचान को पूरी तरह से नहीं समझ पाए थे, जिसका वे अनुसरण करते थे.
किंतु यीशु उनके निकट आए, पुनरुत्थित प्रभु के रूप में उनके सम्मुख खड़े हुए, और यह कहते हुए उन्हें सांत्वना दी, “डरो मत.”
इससे पूर्व, यीशु एक भौतिक शरीर में उनके मध्य रहते थे. इसी कारण, वे एक समय में केवल एक ही स्थान पर उपस्थित हो सकते थे. परंतु अब, मृत्यु से जी उठने के पश्चात्, वे आत्मा के रूप में उपस्थित हैं और एक ही समय में सर्वत्र विद्यमान हो सकते हैं. वे संपूर्ण विश्व के लोगों को एक ही समय पर सांत्वना प्रदान कर सकते हैं. चाहे दिन हो या रात, वह हर समय हमें मज़बूती और दिलासा दे सकता है.
परमेश्वर के प्रिय लोगो, क्योंकि जीवित और पुनर्जीवित प्रभु आपके साथ है, इसलिए आप बिना किसी डर के और आनंद के साथ जीवन बिताए.
मनन के लिए वचन: “जब मैं ने उसे देखा, तो उसके पैरों पर मुर्दा सा गिर पड़ा और उस ने मुझ पर अपना दाहिना हाथ रख कर यह कहा, कि मत डर; मैं प्रथम और अन्तिम और जीवता हूं. मैं मर गया था, और अब देख; मैं युगानुयुग जीवता हूं; और मृत्यु और अधोलोक की कुंजियां मेरे ही पास हैं.” (प्रकाशितवाक्य 1:17–18).
