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मार्च 19 – प्रेम में बने रहें।
“जैसा पिता ने मुझ से प्रेम रखा, वैसा ही मैं ने तुम से प्रेम रखा, मेरे प्रेम में बने रहो. यदि तुम मेरी आज्ञाओं को मानोगे, तो मेरे प्रेम में बने रहोगे: जैसा कि मैं ने अपने पिता की आज्ञाओं को माना है, और उसके प्रेम में बना रहता हूं.” (यूहन्ना 15:9–10).
पवित्र आत्मा के फलों में, सबसे महान फल प्रेम है. पवित्र आत्मा के फलों की सूची प्रेम से ही शुरू होती है (गलातियों 5:22). यह शुद्ध और पवित्र प्रेम यीशु मसीह में पूरी तरह से दिखाई देता है. क्रूस पर स्वयं को बलिदान करके, उन्होंने संसार से इतना अधिक प्रेम किया (यूहन्ना 3:16). इसलिए, इस ईश्वरीय प्रेम में बने रहें.
यीशु मसीह का प्रेम एक त्यागमय प्रेम है. यह कभी भी उस व्यक्ति को नहीं ठुकराता जो उसके पास आता है. यह वह प्रेम है जो हमारे पीछे-पीछे आया, वह प्रेम जिसने हमें दलदल भरी मिट्टी से बाहर निकाला, वह प्रेम जो अंत तक हमसे प्रेम करता है. बाइबल कहती है: “और आशा से लज्ज़ा नहीं होती, क्योंकि पवित्र आत्मा जो हमें दिया गया है उसके द्वारा परमेश्वर का प्रेम हमारे मन में डाला गया है.” (रोमियों 5:5).
प्रेम के बिना, पवित्र आत्मा के वरदानों से कोई लाभ नहीं होता. प्रेरित पौलुस कहते हैं: “यदि मैं मनुष्यों, और सवर्गदूतों की बोलियां बोलूं, और प्रेम न रखूं, तो मैं ठनठनाता हुआ पीतल, और झंझनाती हुई झांझ हूं. और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं.” (1 कुरिन्थियों 13:1–2).
इसलिए, प्रेम में बने रहें.
प्रेम के बिना सेवा-कार्य केवल एक खोखला दिखावा है. प्रेम रहित हृदय एक बंजर हृदय होता है. अंतिम दिनों में, “बहुत से लोगों का प्रेम ठंडा पड़ जाएगा, क्योंकि अधर्म बढ़ जाएगा” (मत्ती 24:12). हमारा प्रेम कभी ठंडा न पड़े और न ही कम हो. हमारे भीतर ईश्वरीय प्रेम की अग्नि को निरंतर प्रज्वलित करते रहे. “मुझे नगीने की नाईं अपने हृदय पर लगा रख, और ताबीज की नाईं अपनी बांह पर रख; क्योंकि प्रेम मृत्यु के तुल्य सामर्थी है, और ईर्षा कब्र के समान निर्दयी है. उसकी ज्वाला अग्नि की दमक है वरन परमेश्वर ही की ज्वाला है. पानी की बाढ़ से भी प्रेम नहीं बुझ सकता, और न महानदों से डूब सकता है. यदि कोई अपने घर की सारी सम्पत्ति प्रेम की सन्ती दे दे तौभी वह अत्यन्त तुच्छ ठहरेगी॥” (श्रेष्ठगीत 8:6-7).
यीशु ने स्वयं प्रेम को परिभाषित किया. केवल उन्हीं में हम पूर्ण प्रेम देखते हैं. पवित्रशास्त्र घोषणा करता है: “परन्तु परमेश्वर हम पर अपने प्रेम की भलाई इस रीति से प्रगट करता है, कि जब हम पापी ही थे तभी मसीह हमारे लिये मरा.” (रोमियों 5:8).
प्रभु यीशु की दयालु दृष्टि में, उनके शब्दों में, उनके कार्यों में, और उनकी शिक्षाओं में—हम प्रेम देखते हैं. प्रेम की वह प्रचंड धारा जो कलवरी के क्रूस से प्रवाहित हुई, हमारे हृदयों को मोह लेती है.
परमेश्वर के प्रिय लोगों, प्रेम में बने रहे.
मनन के लिए वचन: “जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ, कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है, कि हम उसके द्वारा जीवन पाएं.” (1 यूहन्ना 4:9).
