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मार्च 29 – प्रेम अपनी भलाई नहीं चाहता।
“वह अनरीति नहीं चलता, वह अपनी भलाई नहीं चाहता, झुंझलाता नहीं, बुरा नहीं मानता.” (1 कुरिन्थियों 13:5).
एक स्वार्थी व्यक्ति लगातार अपने अधिकारों के लिए लड़ता रहता है. लेकिन एक प्रेमी व्यक्ति, प्रेम की खातिर, अपने निजी अधिकारों को भी खुशी-खुशी त्याग देता है. प्रेम कभी भी अपनी ही बात मनवाने की ज़िद नहीं करता.
जब प्रभु ने अब्राहम को बुलाया, तो उसने सब कुछ पीछे छोड़ दिया—अपना देश, अपने लोग, और अपने पिता का घर—क्योंकि उसके मन में परमेश्वर के लिए गहरा प्रेम था (उत्पत्ति 12:1). प्रेम ने उसे आज्ञाकारी बना दिया. प्रेम ने उसे बलिदान देने के लिए तत्पर कर दिया.
योनातान के जीवन पर विचार करें. हालाँकि शाऊल के बाद राजा बनने का अगला अधिकार उसी का था, फिर भी उसने अपने शाही विशेषाधिकारों को कसकर नहीं पकड़ा. दाऊद के प्रति प्रेम के कारण, उसने उसे अपना चोगा, कवच, तलवार, धनुष और कमरबंद दे दिया (1 शमूएल 18:4). यह ऐसा प्रेम था जो अपने स्वयं के लाभ की नहीं सोचता था.
प्रेरित पौलुस स्वयं को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जब वे लिखते हैं: “जैसा मैं भी सब बातों में सब को प्रसन्न रखता हूं, और अपना नहीं, परन्तु बहुतों का लाभ ढूंढ़ता हूं, कि वे उद्धार पाएं.” (1 कुरिन्थियों 10:33).
और फिर: “हर एक अपनी ही हित की नहीं, वरन दूसरों की हित की भी चिन्ता करे. जैसा मसीह यीशु का स्वभाव था वैसा ही तुम्हारा भी स्वभाव हो.” (फिलिप्पियों 2:4–5).
उन लोगों से प्रेम करना आसान है जो हमसे प्रेम करते हैं. उन लोगों से प्रेम करना अधिक कठिन है जो हमें नज़रअंदाज़ करते हैं. लेकिन हम उन लोगों से कैसे प्रेम करें जो हमारे खुले दुश्मन हैं? यही तो ईश्वरीय स्वभाव है.
प्रभु ने केवल यह आज्ञा ही नहीं दी, “अपने शत्रुओं से प्रेम करो”—बल्कि उन्होंने इसे करके भी दिखाया. जब उन्हें क्रूस पर चढ़ाया गया, तो उनके शत्रुओं ने उनका मज़ाक उड़ाया, उनका अपमान किया, और उन्हें घोर पीड़ा दी. फिर भी उन्होंने धैर्यपूर्वक इसे सहा और प्रार्थना की: “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये नहीं जानते कि ये क्या कर रहे हैं” (लूका 23:34).
यही वह प्रेम है जो अपने स्वार्थ की नहीं सोचता.
पवित्रशास्त्र सिखाता है: “परन्तु यदि तेरा बैरी भूखा हो तो उसे खाना खिला; यदि प्यासा हो, तो उसे पानी पिला; क्योंकि ऐसा करने से तू उसके सिर पर आग के अंगारों का ढेर लगाएगा. बुराई से न हारो परन्तु भलाई से बुराई का जीत लो॥” (रोमियों 12:20–21). पुराने नियम में भी हम पढ़ते हैं: “यदि तेरे शत्रु का बैल वा गदहा भटकता हुआ तुझे मिले, तो उसे उसके पास अवश्य फेर ले आना. फिर यदि तू अपने बैरी के गदहे को बोझ के मारे दबा हुआ देखे, तो चाहे उसको उसके स्वामी के लिये छुड़ाने के लिये तेरा मन न चाहे, तौभी अवश्य स्वामी का साथ देकर उसे छुड़ा लेना॥” (निर्गमन 23:4–5).
परमेश्वर के प्रिय लोगों, प्रेम अपने निजी लाभ की खोज नहीं करता. वह किसी दूसरे के पतन पर आनन्दित नहीं होता. वह किसी प्रकार की पहचान या पुरस्कार की माँग नहीं करता. मसीह का प्रेम हमारे हृदयों पर राज करे—ताकि हम अपने लिए नहीं, बल्कि परमेश्वर की महिमा और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करें.
मनन के लिए वचन: “जब तेरा शत्रु गिर जाए तब तू आनन्दित न हो, और जब वह ठोकर खाए, तब तेरा मन मगन न हो. कहीं ऐसा न हो कि यहोवा यह देख कर अप्रसन्न हो और अपना क्रोध उस पर से हटा ले॥” (नीतिवचन 24:17–18).
