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मार्च 23 – मैं कुछ भी नहीं हूँ।
“और यदि मैं भविष्यद्वाणी कर सकूं, और सब भेदों और सब प्रकार के ज्ञान को समझूं, और मुझे यहां तक पूरा विश्वास हो, कि मैं पहाड़ों को हटा दूं, परन्तु प्रेम न रखूं, तो मैं कुछ भी नहीं.” (1 कुरिन्थियों 13:2).
भविष्यद्वाणी का वरदान वास्तव में एक अनमोल वरदान है. यद्यपि यीशु दो हज़ार वर्ष पहले स्वर्गारोहण कर गए थे, फिर भी आज भी वे अपनी भविष्यद्वाणियों के माध्यम से हमें सांत्वना देने वाले और आत्मिक उन्नति करने वाले संदेश देते हैं. कितनी बार ऐसे शब्द हमारे हृदयों को मज़बूत और प्रोत्साहित करते हैं!
जब प्रेम से भरे हुए सेवक भविष्यद्वाणी करते हैं—तो उसे अच्छी तरह ग्रहण किया जाता है और स्वेच्छा से उसका पालन किया जाता है. यहाँ तक कि डांट-फटकार भी अच्छी तरह ग्रहण की जाती है और उसका पालन किया जाता है, जब वह प्रेम से की जाती है. परन्तु जब ऐसे भविष्यद्वाणी के शब्द बिना प्रेम के बोले जाते हैं, तो लोग हतोत्साहित और आहत हो जाते हैं. प्रेम रहित सेवा-कार्य कोई स्थायी फल उत्पन्न नहीं करता.
इसी प्रकार, किसी व्यक्ति के पास बौद्धिक वरदान हो सकते हैं. वह बाइबल के उन गहरे भेदों को समझ सकता है जिन्हें दूसरे नहीं समझ पाते. वह एक महान विद्वान हो सकता है, जो यीशु के दूसरे आगमन और भविष्य की घटनाओं को असाधारण स्पष्टता के साथ स्पष्ट रूप से बता सकता है. फिर भी यदि उसमें प्रेम नहीं है, तो इससे कोई लाभ नहीं. जब हम परमेश्वर के सामने खड़े होंगे, तो इस बात से कोई फ़र्क नहीं पड़ेगा कि हम कितने शिक्षित थे या हम कितने वरदान-प्राप्त दिखाई देते थे. जिस बात से फ़र्क पड़ेगा, वह यह है कि क्या हमने ईश्वरीय प्रेम में कार्य किया. किसी व्यक्ति के पास चाहे कितने भी वरदान क्यों न हों, प्रेम के बिना उनका कोई मूल्य नहीं है.
एक मोबाइल फ़ोन पर विचार करें. जब हम उसके माध्यम से दूर देश में रहने वाले अपने बच्चों या जीवनसाथी से बात करते हैं, तो उनकी प्रेमपूर्ण आवाज़ हमें आनंद से भर देती है. फ़ोन एक ऐसा माध्यम बन जाता है जो स्नेह और मिलन की लालसा को व्यक्त करता है. परन्तु यदि उसकी बैटरी समाप्त हो जाए, तो वह बेकार हो जाता है.
ठीक इसी तरह, परमेश्वर भविष्यद्वक्ताओं के माध्यम से ऐसे बोलते हैं मानो किसी फ़ोन के द्वारा बोल रहे हों. भविष्यद्वक्ता परमेश्वर का मुखपत्र होता है. वह भविष्य की घटनाओं की भविष्यवाणी करता है, विश्वासियों को मज़बूत करता है, और ईश्वरीय भेदों को प्रकट करता है. फिर भी यदि उस भविष्यद्वक्ता के हृदय में प्रेम अनुपस्थित है, तो सब कुछ व्यर्थ हो जाता है. उसके वरदान न तो उसे स्वयं लाभ पहुँचाते हैं और न ही दूसरों को.
परमेश्वर के प्रिय लोगों, जो लोग परमेश्वर का संदेश मानवता तक पहुँचाते हैं, उन्हें परमेश्वर के प्रेम से भरा होना चाहिए. उन्हें कलवरी के प्रेम से भरा होना चाहिए और वे जो कुछ भी कहते और करते हैं, उन सब में मसीह के प्रेम को प्रतिबिंबित करना चाहिए.
मनन के लिए वचन: “यदि कोई कहे, कि मैं परमेश्वर से प्रेम रखता हूं; और अपने भाई से बैर रखे; तो वह झूठा है: क्योंकि जो अपने भाई से, जिस उस ने देखा है, प्रेम नहीं रखता, तो वह परमेश्वर से भी जिसे उस ने नहीं देखा, प्रेम नहीं रख सकता.” (1 यूहन्ना 4:20).
