जून 04 – प्रेम में ईर्ष्या नहीं होती!

“प्रेम डाह नहीं करता; प्रेम अपनी बड़ाई नहीं करता, और फूलता नहीं”(1कुरन्थियों 13:4,)

मन के जलने से हड्डियाँ भी जल जाती हैं। (नीति वचन 14 : 30) प्रेम करने वालों के हृदय में ईर्ष्या नहीं रहती क्योंकि प्रेम सब बातें सह लेता है, सब बातों की प्रतीति करता है, सब बातों की आशा रखता है, सब बातों में धीरज धरता है। ऐसी जगह  ईर्ष्या का कोई स्थान नहीं। प्रेम में ईर्ष्या नहीं होती।

कबूतर को कड़वाहट नहीं मालूम होती है। सभी पक्षियों को कड़वे पानी वाली पित्त की थैली होती है किंतु कबूतर के अंदर वह कड़वी पित्त की थैली नहीं होती है। इसलिए कबूतर को पवित्र शास्त्र में एक स्थाई स्थान मिला है। पवित्र आत्मा भी कबूतर के साथ खुद को जोड़ते हुए हम देखते हैं। प्रेम करने वाले कबूतर मैं ईर्ष्या नहीं होती है।

ईर्ष्या का आरंभ लुसिफर के हृदय से था। खुद को परमेश्वर की समानता में उठाने और परमेश्वर के प्रति ईर्ष्या रखने के कारण वह स्वर्ग से बाहर निकाला गया। ईर्ष्या के कारण हुआ वह नाश कितना भयंकर नाश है थोड़ा सोच कर देखें।

परमेश्वर ने जब हाबेल के अर्पण को ग्रहण किया तो कैन खुश नहीं हुआ। हमारा सगा छोटा भाई है वह परमेश्वर की आशीष में बढ़ जाए ,ऐसा उसने नहीं सोचा। उसमें तुरंत ईर्ष्या आ गई। वह ईर्ष्या हत्या में बदल गई। अपना सगा भाई है ऐसा भी न सोच कर उसके विरोध में जाकर उसका ही खून कर दिया।(उत्पत्ति 4: 3- 8)

आज भी भाइयों के बीच में ईर्ष्या और जलन को उत्पन्न करने वाला कैन का आत्मा काम करता है। ईर्ष्या को कभी भी आप जगह न दें। भाइयों की उन्नति को देखकर आप खुश होकर परमेश्वर की स्तुति करें। उनमें कोई कमी दिखाई दे ,तो उसे सबको बताकर उनका अपमान न करें वरन उनके लिए प्रार्थना करें।

देखें! यूसुफ के भाई उसके ऊपर ईर्ष्या करते थे। उसी ईर्ष्या के कारण उसे गड्ढे में उठा कर फेंक दिया। उसे मार डालने की कोशिश की। अंत में मिद्दानियों के हाथ में उसे बेच दिया।

अंत में क्या हुआ? जिन भाईयों ने युसूफ से ऐसा किया, उन्हीं भाइयों को उसके सामने दंडवत करने की परिस्थिति परमेश्वर ने निर्मित कर दी। उन लोगों ने सर को झुका कर उसको दंडवत किया। ईर्ष्या करने वालों को झुकाया जाएगा यह निश्चय है।

परमेश्वर के प्यारे बच्चों, कलवरी के प्रेम से भर जाने के लिए अपने आप को अर्पण करें। प्रार्थना की आत्मा आपके अंदर में  प्रज्वलित हो जाए।

ध्यान करने के लिए,”नये जन्मे हुए बच्चों के समान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिये बढ़ते जाओ, क्योंकि तुम ने प्रभु की कृपा का स्वाद चख लिया है।” (1 पतरस 2: 2,3).

Article by elimchurchgospel

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