सितंबर 02 – यरूशलेम की शांति!

“यरूशलेम की शांति का वरदान मागो, तेरे प्रेमी कुशल से रहे। (भजन 122:6)

‘यरूशलेम’ शब्द का अर्थ शांति का शहर है। शांति यरूशलेम से निकलनी चाहिए और यहूदिया, सामरिया और दुनिया के सभी देशों में फैलनी चाहिए।

आध्यात्मिक शब्दों में, यरूशलेम आपके हृदय को दर्शाता है। इसका अर्थ है कि राजाओं के राजा और प्रभुओं के प्रभु, आपके हृदयों में राज्य करें। वह शांति के राजकुमार के रूप में आपके दिल में विराजमान होने चाहिए, जैसे प्रकार हमारा यरूशलेम हमारे भीतर है! आप सभी, जो शांति के परमेस्वर का पीछे चलते है, अपने निजी जीवन में शांति से संबंधित चीजों से अच्छी तरह वाकिफ हैं। आपके लिए शांति के मार्ग का अनुसरण करना, और अपने साथी मनुष्यों के साथ ईश्वर की शांति को बनाए रखना अति आवश्यक है।

यरूशलम शहर को देखे- इस शहर को राजा दाऊद ने वहा से यबूसियों को निकाल कर अपने लिए बनाया था, और उसके बाद, राजा सुलैमान के दिनों में, सुलेमान ने परमेश्वर के लिए एक शानदार मंदिर बनाया। दनिएल अपनी खिड़कियां खोलकर इस पवित्र मंदिर की ओर दिन में तीन बार प्रथना करता था। नहेमायाह ने उस नगर के चारों ओर की शहरपनाह की मरम्मत की और उसे फिर से बनाया।

परन्तु अफसोस, कि हमारे प्रभु यीशु मसीह के दिनों में शहर ने अपनी महिमा और वैभव पूरी तरह खो दिया था। परंपराओं का पालन करते हुए, शहर आध्यात्मिक मामलों में भारी गिरावट में गिर गया था। फरीसी और सदूकी एक भ्रामक जीवन शैली का नेतृत्व कर रहे थे। और परमेश्वर के बहुत से भविष्यद्वक्ताओं को यरूशलेम की सड़कों पर पत्थरवाह करके मार डाला गया। जब यीशु ने यरूशलेम की ओर देखा, तो वह उस नगर के लिए रोया और विलाप किया: “क्या ही भला होता की तू, हा तू ही, इसी दिन की कुशल की बाते जनता, परंतु अब वो तेरी आखो से छिप गयी है।“ (लुका 19:42)

वर्तमान समय में यरुशलम की स्थिति क्या है? यह व्यापार के लिए एक प्रमुख केंद्र और एक महान अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल है। चूंकि इसकी पवित्र भूमि की प्रतिष्ठा के कारण दुनिया भर से लोग शहर में आते हैं। जैतून के पेड़ से बने क्रूश और माला की एक बड़ी बिक्री होती है, साथ ही पानी के कंटेनर भी, जो यरदन नदी या सामरिया के कुएं से लिए जाने का दावा करते हैं। इज़राइल के विभिन्न स्थानों और फूलों की तस्वीरों की भी बिक्री होती है। कृपया इसकी वर्तमान स्थिति को देखें और यरूशलेम शहर के लिए प्रतिदिन प्रार्थना करें।

यह यहूदियों का विश्वास है कि यरूशलेम शहर को पवित्र बनाया जाएगा और मसीहा के आने पर शांति कायम होगी। और वर्तमान समय में भी यहूदियों की यही प्रार्थना है। पुराने नियम नबियों का भी यही दर्शन था, कि जब नया स्वर्ग और नई पृथ्वी स्थापित होगी तब यरूशलेम का नवीनीकरण किया जाएगा। परमेश्वर के प्रिय बच्चों, आपको भी अपने पूरे मन से अनन्त यरूशलेम की ओर देखना चाहिए।

मनन के लिए: “तुम्हारी दीवारों के भीतर शांति हो, तुम्हारे महलों में समृद्धि हो।” (भजन 122:7)

Article by elimchurchgospel

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