जून 30 – आशीषित जन!

” तू धन्य है तू बड़े-बड़े  काम करेगा और तेरे काम सफल होंगे ।”(1 शमूएल 26:25)

पवित्र शास्त्र के इस वचन में एक के बाद एक कई प्रतिज्ञाएं निहित हैं। “तू धन्य है, तू बड़े-बड़े काम करेगा ,और तेरे काम सफल होंगे”  पवित्रशास्त्र का इस तरह कहना, कितना आनंदित करता है।

इन आशीषों के कारण क्या हैं, इनकी मुख्य वजह क्या है? इसे यदि आप सोचें, तो इन आशीषों को आप भी प्राप्त कर सकते हैं। दाऊद को भगाकर उसको मार डालने के लिए शाउल राजा काफी तीव्रता से प्रतीक्षा कर रहा था। वैसा समय एक जंगल में तब आया जब राजा शाउल ,शायद थक कर रथ के बाजू में सो गया। दाऊद और उसका सेनापति अबीशै ने उसे देखा।

अबीशै ने दाऊद को देख कर कहा ‘ परमेश्वर नेआज तेरे शत्रु को तेरे हाथ में कर दिया है,इसलिए अब मैं उसको एक बार ऐसा मारूं कि भाला उसे बेधता हुआ भूमि में धंस जाए ।’ यह सुनकर दाऊद ने क्या कहा आप जानते हैं? “उसे नष्ट न कर ;क्योंकि यहोवा के अभिषिक्त पर हाथ चलाकर कौन निर्दोष ठहर सकता है?”(1शमूएल26:9) ।ऐसा कहकर शाऊल का भाला और सुराही को उठा ले गया। उसे किसी ने न देखा, न किसी ने जाना और कोई जागा भी नहीं था।

परमेश्वर ने उसे दाऊद के हाथ में सौंप दिया फिर भी दाऊद ने उसको मार नहीं डाला और छोड़ दिया इस कार्य ने शाऊल के हृदय को तोड़ दिया। इसलिए शाऊल ने दाऊद को देख कर कहा, “मैंने पाप किया है ; हे मेरे बेटे दाऊद लौट आ, मेरा प्राण आज के दिन तेरी दृष्टि में अनमोल ठहरा, इस कारण मैं फिर तेरी कुछ हानि ना करूंगा ; सुन मैंने मूर्खता की और मुझसे बड़ी भूल हुई है।”(1शमूएल26:21)

यही नहीं शाऊल ने खुश होकर दाऊद से कहा, “हे मेरे बेटे दाऊद, तू धन्य है ! तू बड़े-बड़े काम करेगा और तेरे काम सफल होंगे।”ऐसा बोलकर आशीष दी। परमेश्वर के प्यारे बच्चों, यदि आप चाहते हैं कि परमेश्वर भी आपको इसी तरह  की आशीष से आशीषित करें तो आप किसी अभिषिक्त के विरोध में हाथ न डालें। उसके विरोध में न कुछ कहें ,न कुछ लिखें। क्योंकि जो भी अभिषिक्त हैं वह परमेश्वर के लिए खास हैं।

परमेश्वर के प्यारे बच्चों, जो खानेवाला है उस में से खाना, बलवंत में से जवाबदेही को लाने वाले हमारे परमेश्वर। दुष्टता करने वाले हाथों को भी आपके मदद करने वाले हाथों में बदल देंगे। आप इस सांसारिक जीवन में एक ही बार होकर गुजरते हैं। किसी से भी कोई भी विरोध को न बनाएं। आपको जिस का सामना करना है वह एक ही शत्रु ,शैतान है। आप का युद्ध केवल उससे ही होने दें।

ध्यान करने के लिए, “जब किसी का चाल चलन यहोवा को भावता है, तब वह उसके शत्रुओं का भी उससे मेल कराता है”(नीति वचन 16 :7)।

Article by elimchurchgospel

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