जुलाई 20 – शून्य में भी -आनंद!

“तौभी मैं यहोवा के कारण आनन्दित और मगन रहूंगा, और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा” (हबक्कूक 3:18)।

एक बार, परमेश्वर के कुछ सेवकों ने अपने पसंदीदा पवित्रशास्त्रीय भागों के बारे में अपने विचारों का आदान-प्रदान किया। उनमें से एक ने कहा कि सृष्टि के निर्माण का हिस्सा उसे बहुत पसंद है। दूसरे व्यक्ति ने कहा कि प्रभु की पहाड़ पर की गई प्रार्थना उसे बहुत पसंद है। तीसरे व्यक्ति ने कहा कि प्रकाशितवाक्य की पुस्तक में स्वर्ग के वर्णन ने उसे सबसे अधिक आकर्षित किया। एक अन्य व्यक्ति बहुत आश्वस्त था कि इफिसियों में परमप्रधान की आशीषों वाला हिस्सा सबसे अच्छा पवित्रशास्त्रीय भाग है।

उसी समय, वेबस्टर नाम का एक परमेश्वर का सेवक आया। उसने बाइबल खोली और हबक्कूक 3:17,18 का वचन दिखाया जो कहता है, “क्योंकि चाहे अंजीर के वृक्षों में फूल न लगें, और न दाखलताओं में फल लगें, जलपाई के वृक्ष से केवल धोखा पाया जाए और खेतों में अन्न न उपजे, भेड़शालाओं में भेड़-बकरियां न रहें, और न थानों में गाय बैल न हों, तौभी मैं यहोवा के कारण आनंदित और मगन रहूंगा और अपने उद्धारकर्ता परमेश्वर के द्वारा अति प्रसन्न रहूंगा”

यहाँ बिना शर्त के आनंद का उल्लेख है। दुख, आंसू और नुकसान में भी आनंद के विषय बताया है। यह वह गुण है जो परमेश्वर के प्रत्येक बच्चे में होना चाहिए। प्रेरित पौलुस लिखता है, “ यदि हम जीवित हैं, तो प्रभु के लिये जीवित हैं; और यदि हम मरते हैं, तो प्रभु के लिये मरते हैं; अतः हम जीएं या मरें, हम प्रभु के हैं” (रोमियों 14:8)।

एक मजेदार घटना है जिसमें एक कहानी सुनाई गई और उसमें एक सवाल किया गया था। कहानी इस तरह थी। एक व्यक्ति जीवन में पूरी तरह से निराश था और उसने एक बहती नदी में कूदकर आत्महत्या करने का फैसला किया । उसने यह भी निश्चय किया कि यदि वह नदी के रास्ते में किसी सुखी व्यक्ति को देखेगा तो वह आत्महत्या करने से रुक जाएगा। रास्ते में उसे कोई सुखी व्यक्ति नहीं मिला और वह नदी में कूदने ही वाला था।

कहानी सुनाने वाला व्यक्ति इसी मोड़ पर रुक गया और श्रोताओं से एक प्रश्न किया। सवाल था “अगर वह व्यक्ति नदी में कूदने से पहले आपसे मिल गया होता, तो उसका अगला कदम क्या होता? क्या वह अपना फैसला बदलेगा या आत्महत्या के लिए जाएगा?” अगर आपके सामने ऐसा सवाल रखा जाए तो आपका जवाब क्या होगा? परमेश्वर के प्यारे बच्चों, आपके साथ चलने वाले और आपके विपरीत दिशा में चलने वाले बहुत से लोग दुःख से भरे और उदास हैं। क्या आप में वह पर्याप्त दिव्य आनंद है जो उन दुखी लोगों को यीशु मसीह की ओर मोड़ सके? इस पर विचार करें।

यदि आप प्रसन्न हैं, तो यह दूसरों को चुंबक की तरह परमेश्वर की ओर खींचने में मदद करेगा। गैर मसीही यह जानने के लिए उत्सुक होंगे कि किस बात ने आपको आनंदित किया है और वे यीशु मसीह को जान सकेंगे, जो सुख के मूल स्त्रोत हैं। परमेश्वर के प्यारे बच्चों, हमेशा प्रभु में आनन्दित रहें

ध्यान करने के लिए: “तू ने मेरे मन में उससे कहीं अधिक आनन्द भर दिया है, जो उनको अन्न और दाखमधु की बढ़ती से होता है” (भजन 4:7)।

Article by elimchurchgospel

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