अगस्त 18 – वही करें जो परमेश्वर को भाता है!

“और यह परखो कि प्रभु को क्या भाता है” (इफिसियों 5:10)।

सबसे पहले, आपको उन कामों को करने का संकल्प लेना होगा जो परमेश्वर को प्रसन्न करते हैं। दूसरे, आपको परमेश्वर से प्रार्थना करनी होगी कि वह आपको केवल वही काम करना सिखाए जो उसे प्रसन्न करते हैं। इसके अलावा, आपको यह मालूम करना होगा कि परमेश्वर को क्या पसंद है।

एक बहन जो अपनी युवावस्था में बचाई गई थी, उसे परमेश्वर से अथाह प्रेम था। उसने केवल वे ही काम करने के दृढ़ निश्चय किये जो परमेश्वर को प्रसन्न करें। उसकी  शादी करने के योग्य सही उम्र हुई। तब उसके माता-पिता, जिन्होंने उद्धार नहीं पाया था, उसकी शादी  एक गैर मसीही नौजवान से कर दी।

शादी के बाद के उन शुरुआती दिनों में, आदमी ने अपनी पत्नी को सिनेमा जाने के लिए आमंत्रित किया। लेकिन उसे यह प्रस्ताव बिल्कुल भी पसंद नहीं आया। यह उसके लिए एक समस्या बन गई, जिसने केवल वही करने का संकल्प लिया था जो परमेश्वर को प्रसन्न करेगा।

इसलिए, उसने अकेले एक कमरे में प्रवेश किया और परमेश्वर से प्रार्थना की। उसने परमेश्वर से प्रार्थना की, “प्रभु, मुझे सिखाएं कि आपको क्या पसंद है” और परमेश्वर की सलाह प्राप्त की। फिर, वह खुशी-खुशी अपने पति के साथ सिनेमा देखने चली गई।

फिल्म शुरू हुई। कुछ मिनटों के बाद, आदमी ने अपनी पत्नी की ओर देखा और देखा कि वह आँखें बंद करके बैठी है। दस मिनट के बाद, जब वह धीरे से फिर अपनी पत्नी की ओर मुड़ा, तो उसने देखा उसकी आँखें लगातार बंद थीं और उसका मुँह फुसफुसा रहा था ‘धन्यवाद, यीशु।’ दस मिनट के बाद, वह फिर से उसकी ओर मुड़ा और वह अन्य भाषा में बात कर रही थी। एक गैर मसीही होने के कारण, वह नहीं जानता था कि वह क्या कर रही है।

वह डर गया कि उसे कुछ हो गया है और वह उसे थिएटर से बाहर ले गया। उसने उससे पूछा, “तुम्हें क्या हो गया है? तुम खुशी-खुशी फिल्म क्यों नहीं देख रही थी?” एक मुस्कान के साथ, उसने अपने पति से कहा, “एक खुशी है जो यह फिल्म नहीं दे सकती। यही वह आनंद है जो यीशु मसीह देते हैं।” यह कहकर उसने अपने पति को अपने उद्धार की गवाही दी।

उसकी पत्नी की गवाही ने उस आदमी को गहराई से छुआ। उस दिन परमेश्वर ने पति का भी उद्धार किया। कुछ ही दिनों में, वे दोनों एक साथ परमेश्वर के पूर्ण-कालिक सेवक बन गए। परमेश्वर के प्यारे बच्चों, जब आप उन चीजों को करने की पहल करते हैं जो परमेश्वर को प्रसन्न करती हैं, तो आप निश्चित रूप से अन्यजातियों को प्राप्त करेंगे।

ध्यान करने के लिए: “इस संसार के सदृश न बनो; परन्तु तुम्हारे मन के नए हो जाने से तुम्हारा चाल-चलन भी बदलता जाए, जिससे तुम परमेश्‍वर की भली, और भावती, और सिद्ध इच्छा अनुभव से मालूम करते रहो” (रोमियों 12:2)।

Article by elimchurchgospel

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