अगस्त 14 – प्रभु में प्रसन्नता!

“हे प्रिय और मनभावनी कुमारी, तू कैसी सुन्दरी और कैसी मनोहर है!” (श्रेष्ठगीत 7:6)।

यीशु मसीह आपकी आत्मा से प्रेम करने वाले के रूप में रहते हैं। वह आपकी आत्मा के प्यारे दूल्हे के रूप में भी बने रहते हैं। उन्होंने आपको अपने खून के द्वारा अपनी दुल्हन के रूप में चुना है।

आप उनके शरीर के अवयव के रूप में बने रहते हैैं। यह भेद तो बड़ा है, पर मैं यहां मसीह और कलीसिया के विषय में कहता हूं” (इफिसियों 5: 30, 32) ऐसा प्रेरित पौलुस कहते हैं।

परमेश्वर न केवल आपके प्रति प्यार दिखाते हैं बल्कि आपको प्यार से बुलाते हैं ” हे प्रेमीआप कितने सुखद हैं।” ‘श्रेष्ठगीत’ की पुस्तक के माध्यम से, कोई यह जान सकता है कि स्नेह के कई शब्दों के साथ वह आपको कितना आनंदित करते हैं। वह प्रेम से पुकारते हुए कहते हैं, “मेरी प्रिय, मेरी सुंदरी, मेरी कबूतरी, सर्वांग सुंदरी, मेरी दुल्हन और मेरी राजकुमारी।” इस तरह से पुकारने के लिए प्रभु ने दुल्हन में कौन सी विशेषताएं देखीं? उन्हें प्रसन्न करना ही इसका कारण है।

 

आपको हमेशा उन्हें प्रसन्न करने वाला होना चाहिए। आपको अवश्य ही मसीह को खुश करना है। आपको उस रास्ते पर आगे बढ़ना है जो उन्हें भाता है। पवित्रशास्त्र कहता है, “यहोवा को अपने सुख का मूल जान, और वह तेरे मनोरथों को पूरा करेगा।” (भजन संहिता 37:4)।

एक भाई को अपनी माँ से अथाह प्रेम था। चूंकि वह दूर किसी जगह पर रहती थी, इसलिए वह अक्सर उससे मिलने आता था। वह अपनी माँ के लिए सब कुछ खरीदता और हर महीने उसे पैसे भी भेजता था। एक बार उसके एक मित्र ने उससे पूछा, अपनी माँ से इतना प्रेम करने का कारण क्या है?

भाई ने उत्तर दिया, “मैंने अपनी युवावस्था में अपनी माँ को बहुत दुःख दिया है। मैंने अक्सर उसके आंसू बहाए हैं। मैंने उसे पीटा भी है। वह कई बार सिर पीटकर रो चुकी हैं। मेरे सभी दुर्व्यवहारों के बावजूद, वह मुझसे प्यार करती थी और मेरे लिए प्रार्थना करती थी। उसके प्रयासों के कारण, मुझे परमेश्वर ने बचाया और अभिषिक्त किया है और परमेश्वर ने अब मुझे अपना सेवक बना लिया है। इसलिए, मैं प्रायश्चित और सुधार करने के लिए अपनी माँ के उन दुखद दिनों को याद करता हूँ।”

परमेश्वर के प्यारे बच्चों, परमेश्वर को खुश करना आपके लिए कितना जरूरी है! कितने समय तक  वह  भारी वेदना से भरकर आपको खोजते  रहे! वह आपकी तलाश में तब आये जब आपने उनकी उपेक्षा की और तिरस्कार किया। उन्हें खुश करना कितना महत्वपूर्ण है! परमेश्वर के प्यारे बच्चों, आपको हमेशा प्रभु में प्रसन्न रहना चाहिए।

ध्यान करने के लिए: “मन का आनन्द अच्छी औषधि है, परन्तु मन के टूटने से हड्डियाँ सूख जाती हैं। ” (नीतिवचन 17:22)।

Article by elimchurchgospel

Leave a comment